॥ कर्मकांड विधि ॥

“यतो धर्मस्ततो जयः”

Ancient Indian Ritual

सनातन श्राद्ध एवं पितृ तर्पण मार्गदर्शिका

सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं: एक परिचय

प्रस्तावना एवं भूमिका: “सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं” पुस्तक मूलतः मिथिलादेशीय परंपरा पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य श्राद्ध कर्म की वर्तमान विकृतियों का निवारण करना और शास्त्रोक्त पद्धति को सुलभ बनाना है। मिथिला के शिष्ट एवं विज्ञ जनों का व्यवहार ही धर्म का वास्तविक निर्णय है।

॥ उद्गारः ॥ “मैं इसे अपना परम सौभाग्य मानता हूँ कि जगदीशवर ने इस पवित्र कार्य के निमित्त मेरा चयन किया। यह पुस्तक न केवल व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करती है, बल्कि शास्त्रीय विसंगतियों को दूर कर सम्यक मार्ग प्रदर्शित करती है।”

अपात्रक श्राद्ध का आरंभ और रहस्य

Vedic Rituals

महत्वपूर्ण तथ्य: पात्रता समाप्त होने पर पात्र-रहित (ब्राह्मण में देव-पितृ-प्रेत का आवाहन किए बिना) जो श्राद्ध हुआ, वही अपात्रक है। वर्तमान काल में जब पुरोहित वर्ग दान-दक्षिणा ग्रहण करने में असमर्थता जताते हैं, तब कुशा-ब्राह्मण का प्रयोग कर अपात्रक विधि से कर्म संपन्न किया जाता है।

श्राद्ध विधि

शास्त्रोक्त पद्धति से पितरों की प्रसन्नता हेतु श्राद्ध कर्म की विस्तृत जानकारी।

वैदिक मंत्र

शुद्ध उच्चारण एवं अर्थ सहित पितृ तर्पण एवं पूजन के वैदिक मंत्र।

पितृ पक्ष

पितृ पक्ष का महत्व, तिथियाँ और विशेष अनुष्ठान संबंधी सूचनाएं।

हमारे बारे में

हमारी वेबसाइट संपूर्ण कर्मकांड विधि का उद्देश्य धर्म-संस्कृति और कर्मकांड के बारे में जनमानस में जागरूकता फैलाना है। हम शास्त्रीय और प्रामाणिक तथ्यों को सप्रमाण प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं। प्राचीन भारतीय परंपराओं के अनुसार पितरों का सम्मान और उनकी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करना हमारा मुख्य लक्ष्य है।

संपर्क: www.karmkandvidhi.in

Scroll to Top