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मासिक श्राद्ध
ऊर्ध्वपुण्ड्र धारण, पवित्रीकरण, संध्या वा सूर्यार्घ्य दान पूर्वक गायत्री जप, तर्पण व तिलांजलि, पंचदेवता-विष्णुपूजन, अंगारभ्रमण, गौरमृत्तिका आच्छादन, रक्षादीप प्रज्वलन, दिग्बन्धन, पाक आदि करके आगे की यथाव्यवस्था क्रिया आरम्भ करे। पवित्रीकरणादि का उचित क्रम : तिलकधारण, शिखाग्रंथि, पवित्रीधारण, पवित्रीकरण, आचमन इस प्रकार है। दिग्रक्षण मंत्र : ॐ नमो नमस्ते गोविन्द पुराण पुरूषोत्तम । इदं श्राद्धं हृषीकेश…
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दान विधि
वर्त्तमान में महापात्र का भी कुशोदक पूर्वक प्रतिग्रहाधिकार सुरक्षित नहीं रहा और अब उक्त विधि से दान नहीं किया जा सकता। अर्थात अब दान महापात्र को देना हो अथवा पुरोहित को दोनों में ही कुशाब्राह्मण (दर्भबटु) को दान किया जायेगा। एक विषय महत्वपूर्ण है वो यह कि महापात्र को जो दान दिया जाता है वो…
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द्वादशाह कर्म
मासिक श्राद्ध एकादशाह और द्वादशाह दोनों ही दिन किया जा सकता है क्योंकि शास्त्रों में दोनों ही दिन (अपकृष्ट होने पर) करने का विधान मिलता है। मिथिला में द्वादशाह के दिन अपकृष्ट मासिक श्राद्ध करने का पक्ष स्वीकार किया गया है। अस्तु द्वादशाह के दिन मासिक श्राद्ध और सपिंडीकरण श्राद्ध दोनों किया जाता है। मासिक…
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सपिंडीकरण
सामान्य कर्मकांडियों के लिये अधिक उपयोगी हो इस कारण पितृश्राद्ध में तंत्रप्रयोग ही किया गया है और जहां-जहां तंत्र का शास्त्र से निषेध है वहां पालन भी किया गया है किन्तु यदि विद्वद्जन तंत्र से न करना चाहें तो वर्त्तमान में इसको भी स्पष्ट कर देना आवश्यक है अन्यथा इसको आधार मानकर कुछ लोग विरोध…